Jeremiah

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Hindi O.V. (Re-edited)

1 हे बिन्यामीनियो, यरूशलेम में से अपना अपना सामान लेकर भागो! तकोआ में नरसिंगा फूँको, और बेथक्‍केरेम पर झण्डा ऊँचा करो; क्योंकि उत्तर की दिशा से आनेवाली विपत्ति बड़ी और विनाश लानेवाली है।

2 सिय्योन की सुन्दर और सुकुमार बेटी का मैं नाश करने पर हूँ।

3 चरवाहे अपनी अपनी भेड़-बकरियाँ संग लिए हुए उस पर चढ़कर उसके चारों ओर अपने तम्बू खड़े करेंगे, वे अपने अपने पास की घास चरा लेंगे।

4 “आओ, उसके विरुद्ध युद्ध की तैयारी करो; उठो, हम दोपहर को चढ़ाई करें!” “हाय, हाय, दिन ढलता जाता है, और साँझ की परछाईं लम्बी हो चली है!”

5 “उठो, हम रात ही रात चढ़ाई करें और उसके महलों को ढा दें!”

6 सेनाओं का यहोवा तुम से कहता है : “वृक्ष काट काटकर यरूशलेम के विरुद्ध मोर्चा बाँधो! यह वही नगर है जो दण्ड के योग्य है; इसमें अन्धेर ही अन्धेर भरा हुआ है।

7 जैसा कूएँ में से नित्य नया जल निकला करता है, वैसा ही इस नगर में से नित्य नई बुराई निकलती है; इसमें उत्पात और उपद्रव का कोलाहल मचा रहता है; चोट और मारपीट मेरे देखने में निरन्तर आती है।

8 हे यरूशलेम, ताड़ना से ही मान ले, नहीं तो तू मेरे मन से भी उतर जाएगी; और, मैं तुझ को उजाड़कर निर्जन कर डालूँगा।”

9 सेनाओं का यहोवा यों कहता है : “इस्राएल के सब बचे हुए दाखलता के समान ढूँढ़कर तोड़े जाएँगे; दाख के तोड़नेवाले के समान उस लता की डालियों पर फिर अपना हाथ लगा।”

10 मैं किससे बोलूँ और किसको चिताकर कहूँ कि वे मानें? देख, ये ऊँचा सुनते हैं  , वे ध्यान भी नहीं दे सकते; देख, यहोवा के वचन की वे निन्दा करते और उसे नहीं चाहते हैं।

11 इस कारण यहोवा का कोप मेरे मन में भर गया है; मैं उसे रोकते रोकते उकता गया हूँ। “बाजारों में बच्‍चों पर और जवानों की सभा में भी उसे उंडेल दे; क्योंकि पति अपनी पत्नी के साथ और अधेड़ बूढ़े के साथ पकड़ा जाएगा।

12 उन लोगों के घर और खेत और स्त्रियाँ सब दूसरों की हो जाएँगी, क्योंकि मैं इस देश के रहनेवालों पर हाथ बढ़ाऊँगा,” यहोवा की यही वाणी है।

13 “क्योंकि उनमें छोटे से लेकर बड़े तक सब के सब लालची हैं; और क्या भविष्यद्वक्‍ता क्या याजक सब के सब छल से काम करते हैं।

14 वे, ‘शान्ति है, शान्ति’, ऐसा कह कहकर मेरी प्रजा  के घाव को ऊपर ही ऊपर चंगा करते हैं, परन्तु शान्ति कुछ भी नहीं।  

15 क्या वे कभी अपने घृणित कामों के कारण लज्जित हुए? नहीं, वे कुछ भी लज्जित नहीं हुए; वे लज्जित होना जानते ही नहीं; इस कारण जब और लोग नीचे गिरें, तब वे भी गिरेंगे, और जब मैं उनको दण्ड देने लगूँगा,तब वे ठोकर खाकर गिरेंगे,” यहोवा का यही वचन है।  

16 यहोवा यों भी कहता है : “सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी में चलो, और तुम अपने अपने मन में चैन पाओगे।   पर उन्होंने कहा, ‘हम उस पर न चलेंगे।’

17 मैं ने तुम्हारे लिये पहरुए बैठाकर कहा, ‘नरसिंगे का शब्द ध्यान से सुनना!’ पर उन्होंने कहा, ‘हम न सुनेंगे।’

18 इसलिये हे जातियो, सुनो, और हे मण्डली, देख, कि इन लोगों में क्या हो रहा है।

19 हे पृथ्वी, सुन; देख, कि मैं इस जाति पर वह विपत्ति ले आऊँगा जो उनकी कल्पनाओं का फल है, क्योंकि इन्होंने मेरे वचनों पर ध्यान नहीं लगाया, और मेरी शिक्षा को इन्होंने निकम्मी जाना है।

20 मेरे लिये जो लोबान शबा से, और सुगन्धित नरकट जो दूर देश से आता है, इसका क्या प्रयोजन है? तुम्हारे होमबलियों से मैं प्रसन्न नहीं हूँ, और न तुम्हारे मेलबलि मुझे मीठे लगते हैं।

21 इस कारण यहोवा ने यों कहा है, ‘देखो, मैं इस प्रजा के आगे ठोकर रखूँगा, और बाप और बेटा, पड़ोसी और मित्र, सब के सब ठोकर खाकर नाश होंगे।’ ”

22 यहोवा यों कहता है : “देखो, उत्तर से वरन् पृथ्वी की छोर से एक बड़ी जाति के लोग इस देश के विरोध में उभारे जाएँगे।

23 4KSKWHIOCkp+CkqOClge Ckty DgpJTgpLAg4KSs4KSw4KWN4KSb4KWAIOCkp+Ckvu CksOCkoy DgpJXgpL/gpI8g4KSKWB4KSPIOCkhu Ckj+Ckge Ckl+Clhywg4KSKWHIOCkle Clje CksOClgu CksCDgpJTgpLAg4KSo4KS/4KSw4KWN4KSm4KSv4KWAIOCkue CliOCkgiwg4KSU4KSwIOCknOCkrCDgpLXgp Ycg4KSs4KWL4KSy4KSk4KWHIOCkue CliOCkgi DgpKTgp Kwg4KSu4KS+4KSo4KWLIOCkuOCkru Clge Ckpu Clje CksCDgp JfgpLDgp JzgpKTgpL4g4KSKWIOy DgpLXgp Ycg4KSY4KWL4KSh4KSKWL4KSCIOCkqu CksCDgp JrgpKLgp Lzgp Ycg4KSKWB4KSPIOCkhu Ckj+Ckge Ckl+Clhywg4KSKWHIOCkuOCkv+Ckr+Clje Ckr+Cli+Ckq Dxm PuKAi VszXTwv Zj4sIOCkte Clhy DgpLXgpYDgpLAg4KSV4KWHIOCkuOCkru Ckvu CkqCDgp Ljgp Lbgp LjgpY3gpKTgpY3gpLDCnSDgp Lngp YvgpJXgpLA8Zj7ig IlbNFL2Y+IOCkpOClge Ckri Dgp KrgpLAg4KSa4KSi4KSKS+4KSIIOCkle CksOClh+Ckgu Ckl+Clh+ClpOKAnQ==

24 इसका समाचार सुनते ही हमारे हाथ ढीले पड़ गए हैं; हम संकट में पड़े हैं; ज़च्‍चा की सी पीड़ा हम को उठी है।

25 मैदान में मत निकलो, मार्ग में भी न चलो; क्योकि वहाँ शत्रु की तलवार और चारों ओर भय दिखाई पड़ता है।

26 हे मेरी प्रजा  कमर में टाट बाँध, और राख में लोट; जैसा एकलौते पुत्र के लिये विलाप होता है वैसा ही बड़ा शोकमय विलाप कर; क्योंकि नाश करनेवाला हम पर अचानक आ पड़ेगा।

27 “मैं ने इसलिये तुझे अपनी प्रजा के बीच गुम्मट और गढ़ ठहरा दिया कि तू उनकी चाल परखे और जान ले।

28 वे सब बहुत ही हठी हैं, वे लुतराई करते फिरते हैं; उन सभों की चाल बिगड़ी है, वे निरा ताँबा और लोहा ही हैं।

29 धौंकनी जल गई, सीसा आग में जल गया; ढालनेवाले ने व्यर्थ ही ढाला है; क्योंकि बुरे लोग नहीं निकाले गए।

30 उनका नाम खोटी चाँदी पड़ेगा, क्योंकि यहोवा ने उनको खोटा पाया है।”

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