Zechariah

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Hindi O.V. (Re-edited)

1 फिर जो दूत मुझ से बातें करता था, उस ने आकर मुझे ऐसा जगाया जैसा कोई नींद से जगाया जाए।

2 उसने मुझ से पूछा, “तुझे क्या दिखाई पड़ता है?” मैं ने कहा, “एक दीवट है, जो सम्पूर्ण सोने की है, और उसका कटोरा उसकी चोटी पर है, और उस पर उसके सात दीपक हैं; जिन के ऊपर बत्ती के लिये सात सात नालियाँ हैं।

3 दीवट के पास जैतून के दो वृक्ष हैं, एक उस कटोरे की दाहिनी ओर, और दूसरा उसकी बाईं ओर।”  

4 तब मैं ने उस दूत से जो मुझ से बातें करता था पूछा, “हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?”

5 जो दूत मुझ से बातें करता था, उस ने मुझ को उत्तर दिया, “क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं?” मैं ने कहा, “हे मेरे प्रभु, मैं नहीं जानता।”

6 तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, “जरुब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है :   न तो बल से, और न शक्‍ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।

7 हे बड़े पहाड़, तू क्या है? जरुब्बाबेल के सामने तू मैदान हो जाएगा; और वह चोटी का पत्थर यह पुकारते हुए आएगा, उस पर अनुग्रह हो, अनुग्रह!”

8 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा,

9 “जरुब्बाबेल ने अपने हाथों से इस भवन की नींव डाली है, और वही अपने हाथों से उसको तैयार भी करेगा। तब तू जानेगा कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

10 क्योंकि किसने छोटी बातों का दिन तुच्छ जाना है? यहोवा अपनी इन सातों आँखों से सारी पृथ्वी पर दृष्‍टि करके साहुल को जरुब्बाबेल के हाथ में देखेगा,   और आनन्दित होगा।”

11 तब मैं ने उससे फिर पूछा, “ये दो जैतून के वृक्ष क्या हैं जो दीवट की दाहिनी-बाईं ओर हैं?”  

12 फिर मैं ने दूसरी बार उससे पूछा, “जैतून की दोनों डालियाँ क्या हैं जो सोने की दोनों नालियों के द्वारा अपने में से सुनहरा तेल उण्डेलती हैं?”

13 उसने मुझ से कहा, “क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं?” मैं ने कहा, “हे मेरे प्रभु, मैं नहीं जानता।”

14 तब उसने कहा, “इनका अर्थ ताज़े तेल से भरे हुए वे दो पुरुष हैं  जो सारी पृथ्वी के परमेश्‍वर के पास हाज़िर रहते हैं।”

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