Zechariah

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Hindi O.V. (Re-edited)

1 “उस समय दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों के लिये पाप और मलिनता धोने के निमित्त एक बहता हुआ सोता फूटेगा।

2 “सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, कि उस समय मैं इस देश में से मूरतों के नाम मिटा डालूँगा, और वे फिर स्मरण में न रहेंगी; और मैं भविष्यद्वक्‍ताओं और अशुद्ध आत्मा को इस देश में से निकाल दूँगा।

3 और यदि कोई फिर भविष्यद्वाणी करे, तो उसके माता-पिता जिनसे वह उत्पन्न हुआ, उससे कहेंगे, ‘तू जीवित न बचेगा, क्योंकि तू ने यहोवा के नाम से झूठ कहा है;’ इसलिये जब वह भविष्यद्वाणी करे, तब उसके माता-पिता जिनसे वह उत्पन्न हुआ उसको बेध डालेंगे।

4 उस समय हर एक भविष्यद्वक्‍ता भविष्यद्वाणी करते हुए अपने अपने दर्शन से लज्जित होंगे, और धोखा देने के लिये कम्बल का वस्त्र न पहिनेंगे,

5 परन्तु वह कहेगा, ‘मैं भविष्यद्वक्‍ता नहीं, किसान हूँ; क्योंकि लड़कपन ही से मैं दूसरों का दास हूँ।’

6 तब उससे यह पूछा जाएगा, ‘तेरी छाती में ये घाव कैसे हुए  ,’ तब वह कहेगा,‘ये वे ही हैं जो मेरे प्रेमियों के घर में मुझे लगे हैं।’ ”

7 सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, “हे तलवार, मेरे ठहराए हुए चरवाहे के विरुद्ध अर्थात् जो पुरुष मेरा स्वजाति है, उसके विरुद्ध चल। तू उस चरवाहे को काट, तब भेड़-बकरियाँ तितर-बितर हो जाएँगी; और बच्‍चों पर मैं अपने हाथ बढ़ाऊँगा।  

8 यहोवा की यह भी वाणी है, कि इस देश के सारे निवासियों की दो तिहाई मार डाली जाएगी, और बची हुई तिहाई उस में बनी रहेगी।

9 उस तिहाई को मैं आग में डालकर ऐसा निर्मल करूँगा, जैसा रूपा निर्मल किया जाता है, और ऐसा जाँचूँगा जैसा सोना जाँचा जाता है। वे मुझ से प्रार्थना किया करेंगे, और मैं उनकी सुनूँगा। मैं उनके विषय में कहूँगा, ‘ये मेरी प्रजा हैं,’ और वे मेरे विषय में कहेंगे, ‘यहोवा हमारा परमेश्‍वर है।’ ”

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